मातारानी के मंदिर में उमड़ रहा भक्तों का सैलाब

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मालथौन तहसील सहित मुख्यालय पर जगह-जगह मातारानी के स्वरुप विराजमान किये गये है माँ के भक्त सुबह से माँ आराधना में ल्लीन है। सुबह से माँ के चरणों में जल अर्पित करने पहुंच रहे हैं देर रात्रि तक पूजा-अर्चना कर रहे है। माँ का पर्व दस दिनों तक धूम-धाम से मनाया जायेगा। माँ के भक्त उपवास को धारण किये हुये हैं स्वरुप स्थलों पर सुबह से माँ के चरणों में जल अर्पित, पूजन आरती दोपहर में माँ भक्ते, रामायण पाठ, संध्याकालीन महाआरती इत्यादि कार्यक्रम हो रहे है। महाआरती में जगह-जगह भक्तागण शामिल होकर धर्ममय हो रहे है इस बार कर्मकांडी पंडितों के अनुसार दस दिन तक मातारानी की आराधना चलेगी।
प्राचीन किला मंदिर तहसील मुख्यालय का हदय स्थली हैं जहां जगत जननी माँ जगदंबा का स्वरुप विराजमान है बताया जाता है कि पाल शासक सम्राट के समय का मंदिर बना हुआ हैं यहा वर्षभर सैकडों श्रद्धालु प्रतिदिन मातारानी अपार श्रृद्धा प्रकट करते आ रहे है। नवरात्र में हजारों श्रृद्धालु सुबह से देर रात्रि तक माँ के दर्शनों के लिए पहुंचते है एक ओर विशेषता है माँ का स्वरुप प्राचीन है भारत में दो ही स्थानों पर मां का ऐसा स्वरुप है विराजमान है एक तो कलकत्ता में तो दूसरा स्वरुप सागर जिले मालथौन कस्बा में विराजमान हैं। मातारानी के भक्तों पर विशेष कृपा है। मातारानी के दरबार में सच्ची श्रृद्धा से की गई मनोकामना पूर्ण होती है मातारानी के दर्शनों उपरांत बार-बार मां दर्शनों को भक्त लालियत रहते है उक्त स्थल का वातावरण हमेशा अनुकूल बना रहता हैं। नवरात्रि के अवसर पर भक्तगण वर्षो से अखण्ड, रामायण पाठ का आयोजन चल रहा हैं। रात्रि में सैकडों की संख्या में भक्तगण महाआरती में शामिल होकर धर्मलाभ अर्जित कर रहे हैं।
भक्तों का लगा मेला
क्षेत्रभर में माँ के प्रति भक्तों की अपार श्रृद्धा देखने को मिल रही हैं। मुख्यालय के राय मुहल्ला, हनुमान फाटक, नया बाजारा प्रांगण में 9 मातारानी के स्वरुप विराजमान, थाना परिसर, पठला मुहल्ला, पुराना बाजार, लोहगडिया मुहल्ला इत्यादि स्थानों पर नव दुर्गा सेवा समितियों के द्वारा अदभुत माँ का स्वरुप विराजमान किए है हनुमान फाटक एवं राय मुहल्ला नवदुर्गा सेवा समिति द्वारा माँ का अदभुत स्वरुपों में विराजमान है। सभी स्थानों पर सैकडों भक्त महाआरती में शामिल हो रहे है। श्रीमति सीमा जमना राय यजमान बनकर आराधना कर रहे हैं। जगह-जगह पंडालों में मातारानी विराजी गई जहां पंडलों का आर्कषक सजाया गया चारो और रौशनी एवं सजावट की गई।

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